जीवन संवारतीं पुस्तकें
इस वैबसाइट से आप डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित साहित्य, संस्कृति और इतिहास के ग्रंथ खरीद सकते हैं जो संसार भर में सम्मान के साथ पढ़े जाते हैं।
ज्ञान का खजाना
यदि आप वामपंथी लेखकों द्वारा लिखे गए इतिहास एवं साहित्य के मकड़जाल से निकलकर भारत का वास्तविक इतिहास राष्ट्रीय साहित्य पढ़ना चाहते हैं तो यह वैबसाइट आपके लिए है।
डॉ. मोहनलाल गुप्ता विगत 40 वर्षों से भारत के इतिहास, संस्कृति एवं साहित्य ग्रंथ लिख रहे हैं। उनकी पुस्तकों ने हजारों युवाओं का जीवन संवारा है।
इन पुस्तकों ने युवाओं के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवाओं तथा राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं से लेकर विभिन्न स्तर की नौकरियों के लिए लिखित परीक्षा और मौखिक साक्षात्कार की तैयारी के लिए राह आसान की है। आज देश में हजारों युवा उन्हें अपने शिक्षक की तरह सम्मान देते हैं। आप भी इन पुस्तकों तक आसानी से पहुंच बना सकते हैं।
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डॉ. मोहनलाल गुप्ता
भारतीय इतिहास के पन्नों से धूल झाड़कर उसे वास्तविक और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के साथ समाज के सामने लाने वाले विद्वानों में डॉ. मोहनलाल गुप्ता का नाम बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है। पिछले चार दशकों से अधिक समय से उनका लेखन भारत की गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और साहित्य को समर्पित है।
शैक्षिक पृष्ठभूमि और प्रारंभिक जीवन
डॉ. गुप्ता की ज्ञान-पिपासा और उनके अध्ययन का दायरा अत्यंत विस्तृत है। उन्होंने न केवल कृषि विज्ञान में स्नातक किया, बल्कि पत्रकारिता एवं जनसंचार में भी स्नातक की उपाधि प्राप्त की। साहित्य के प्रति प्रेम उन्हें हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर तक ले गया और अंततः इतिहास में डॉक्टरेट (Ph.D.) के माध्यम से उन्होंने अपने शोधपूर्ण जीवन की नींव रखी।
प्रशासनिक अनुभव और लेखन का संकल्प
डॉ. गुप्ता ने अपने करियर की शुरुआत एक बैंक अधिकारी के रूप में की, जिसके बाद उन्होंने आकाशवाणी में प्रसारण अधिशासी के रूप में सेवाएं दीं। राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में उच्च पदों पर रहते हुए उन्हें राजस्थान के तीन मुख्यमंत्रियों के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी के रूप में कार्य करने का अनुभव प्राप्त हुआ। हालांकि, सरकारी सेवा की व्यस्तताओं के बीच लेखन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में बाधा आने लगी। अपने इसी ‘लेखन संकल्प’ को पूरा करने के लिए उन्होंने स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और स्वयं को पूर्णतः मां सरस्वती की साधना में समर्पित कर दिया।
साहित्यिक एवं ऐतिहासिक अवदान
डॉ. गुप्ता की लेखन-यात्रा अद्भुत है। अब तक उनकी 100 से अधिक पुस्तकें हिन्दी और अंग्रेजी में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी कृतियों का विस्तार और प्रभाव निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- इतिहास का पुनर्लेखन: डॉ. गुप्ता ने तुर्कों और मुगलों के इतिहास को वामपंथी इतिहासकारों के मकड़जाल से बाहर निकालने का साहसिक कार्य किया है। उन्होंने शोध ग्रंथों के माध्यम से मुगल एवं ब्रिटिश शासकों का वास्तविक चेहरा जनता के सामने रखा, जो देशभर में प्रशंसित हुए।
- अकादमिक प्रभाव: उनके द्वारा तीन खंडों में लिखित ‘भारत का इतिहास’ आज उत्तर भारत के हिंदी भाषी विश्वविद्यालयों के हजारों छात्रों के लिए आधार स्तंभ है। उन्होंने भारत की लुप्त सभ्यताओं का शोधपूर्ण इतिहास लिखा तथा भारतीय संस्कृति का इतिहास लिखकर भारत के इतिहास में मील के पत्थर स्थापित किए।
- राजस्थान का ज्ञान कोश: राजस्थान के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अध्ययन पर आधारित उनके सात खंडों के ग्रंथ और ‘राजस्थान ज्ञान कोश’ राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं हैं।
- बहुभाषी पहुँच: उनकी कहानियाँ और पुस्तकें न केवल हिन्दी व अंग्रेजी, बल्कि मराठी और तेलुगू जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवादित होकर पाठकों का मार्गदर्शन कर रही हैं।
सम्मान एवं पुरस्कार : उनकी विद्वत्ता और राष्ट्रवादी चिंतन को समाज के हर वर्ग ने सराहा है। उन्हें देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है।
अद्भुत ग्रंथ - अद्भुत ज्ञान
डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित अद्भुत ग्रंथ, अद्भुत ज्ञान के कोश हैं। इनकी विषय-वस्तु विस्तृत है और दिशा राष्ट्रवादी है। सत्य की रक्षा एवं शोध की शक्ति इन ग्रंथों की आत्मा है।
पाठकों की राय
ऐतिहासिक शोध, मानव मनोविज्ञान एवं जीवनदृष्टि से ओत-प्रोत ग्रंथों के लेखक
डॉ. मोहनलाल गुप्ता का पाठक वर्ग न केवल सम्पूर्ण भारत में अपितु
भारत से बाहर के देशों में भी विस्तृत है।
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