Description
इस पुस्तक में भारत की प्राचीन सभ्यताओं का इतिहास लिखा गया है जो आज से हजारों साल पहले विकसित हुईं तथा धरती पर अपने चिह्न छोड़कर काल के गाल में समा गईं। इन सभ्यताओं की कहानी उन भारतीय बंदरों से आरम्भ होती है जो मनुष्य बनते-बनते रह गए। उनके बाद वे बंदर आए जो हाथों में पत्थर लेकर दो पैरों पर चलने लगे। फिर आया आदिमानव जिसने पत्थरों के औजार बनाए, कच्ची मिट्टी के बर्तन तथा कच्ची ईंटों के घर बनाए, पशुपालन औरखेती आरम्भ की। उनके बाद ताम्बे, कांसे और लोहे की सभ्यताओं वाले आर्य एवं द्रविड़ आए। वेद रचे गए, रामजी की अयोध्या बसी, कृष्णजी की द्वारिका बसी, पाण्डवों का हस्तिनापुर बसा। विदेशी धरती से आए शक, कुषाण एवं हूणों की सभ्यताएं सजीं। भारत ने मौर्य युग से लेकर गुप्तकाल एवं हर्षकाल में प्रवेश किया। इन समस्त भारतीय सभ्यताओं की अपनी विशेषताएँ एवं रोचकताएँ थीं जो अब काल के गाल में समा गई हैं। इस पुस्तक में भारत की इन लुप्त सभ्यताओं की विशेषताओं को विस्तार एवं साक्ष्यों के साथ लिखा गया है। एक बार यदि आप इस पुस्तक को पढ़ना आरम्भ करेंगे तो पूरी किए बिना नहीं उठेंगे।




