Description
इस पुस्तक में डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने आधुनिक भौतिक विज्ञान के गर्भ से निकले क्वाण्टम विज्ञान के विविध पक्षों का भारतीय वेदांत में हजारों सालों से उपलब्ध विज्ञान से मिलान करके यह सिद्ध किया है कि भारतीय ऋषियों का ज्ञान बिना किसी प्रयोगशाला के भी एंसा स्वयंसिद्ध विज्ञान था जो माइण्ड एण्ड मैटर अर्थात् चेतना और पदार्थ के बीच के उस वास्तविक सम्बन्ध को उजागर करने में सक्षम था जिस दिशा में आज का विज्ञान बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। जिस प्रकार वेदांत क्वाण्टम की गहरी समझ रखता है उसी प्रकार वेदांत ब्रह्माण्ड के सम्बन्ध में भी गहरी समझ रखता है। अंतर केवल आधुनिक विज्ञान की भाषा और वेदांत में प्रयुक्त भाषा का ही है। विज्ञान और वेदांत अंततः एक ही बिंदु पर पहुंच रहे हैं।




