Description
सवाई राजा जयसिंह (द्वितीय) अठारहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में उत्तर भारत के राजाओं में सर्वाधिक चर्चित, प्रशंसित, बुद्धिमान, दूरदर्शी और प्रभावशाली राजा हुआ। वह ढूंढाढ़ प्रदेश में स्थित विशाल आम्बेर रियासत के महान राजाओं में सर्वप्रमुख था। औरंगजेब ने सवाई जयसिंह को उसके बालपन में ही निबटा देने की योजनाएं बनाईं। दस साल की अल्पायु में जयसिंह को दक्षिण के मोर्चे पर लड़ने के लिए जाना पड़ा तथा 12 वर्ष की आयु में आम्बेर रियासत का शासन संभालना पड़ा। इस महान राजा ने 43 साल तक मुगल दरबार के षड़यंत्रों, मराठा सरदारों, जाट राजाओं और पड़ौसी राजपूत रियासतों का सामना किया तथा हिन्दू प्रजा, संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान को संरक्षण देने के लिये विपुल धन, समय और संसाधन जुटाए। वह शस्त्र और शास्त्र का धनी था। प्रजा वत्सल था, शरणागत को अभय देने वाला था और भगवान विष्णु का भक्त था। परिस्थितियों के हाथों विवश होकर उसे युद्ध लड़ने पड़े किंतु वह युद्धों का नहीं, शांति का दूत था।




