Description
डॉ. मोहनलाल गुप्ता की पुस्तक लाल किले की दर्द भरी दास्तान मुगल साम्राज्य के पतन और भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का एक प्रामाणिक व जीवंत दस्तावेज है। इस ऐतिहासिक ग्रंथ में लेखक ने लाल किले के निर्माण (1638 ई.) से लेकर 1858 ई. तक के रक्तरंजित इतिहास का मार्मिक वर्णन किया है। यह पुस्तक उन साजिशों, हत्याओं और तख्त-ओ-ताज की खूनी जंग का गवाह है, जो मुगलों के हरम और दरबार में रची गईं। इसमें शाहजहां की कैद, औरंगजेब की सत्ता-लोलुपता, परवर्ती मुगलों की विलासिता और अंतिम सम्राट बहादुरशाह जफर के दुःखद निर्वासन की दास्तान बेहद स्पष्टता से लिखी गई है।
साथ ही, यह पुस्तक 1857 की महान क्रांति और बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के वीर सिपाहियों पर इसी लाल किले में चले ऐतिहासिक मुकदमों (लाल किला ट्रायल) पर भी विस्तृत प्रकाश डालती है।
यह पुस्तक केवल ईंट-पत्थरों का इतिहास नहीं है, बल्कि सत्ता की क्रूरता और राष्ट्र-प्रेम का ऐसा दर्पण है, जो इतिहास के शोधार्थियों और सामान्य पाठकों की बौद्धिक जिज्ञासा को शांत करने के लिए अत्यंत उपयोगी है।




