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भारतीय ज्योतिष एवं काल गणना का इतिहास (Paperback)

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Original price was: ₹600.00.Current price is: ₹400.00.

  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 384
  • Book Format: पेपरबैक, डिजिटल  प्रिंटिंग, रॉयल साइज
  • Publisher: Shubhda Prakashan

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Description

डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक भारतीय ज्योतिष एवं काल गणना का इतिहास भारतीय ज्ञान परंपरा के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गूढ़ विषय को सरल एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक भारतीय ज्योतिष शास्त्र और काल गणना (टाइम-रिकनिंग सिस्टम) के विकास, सिद्धांतों और ऐतिहासिक आधारों का व्यापक अध्ययन प्रदान करती है। लेखक डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने इस विषय को गहराई से शोध कर प्रस्तुत किया है, जिससे यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी बन जाती है।

इस पुस्तक में प्राचीन भारत में समय की गणना के विभिन्न तरीकों का विस्तार से वर्णन किया गया है। वैदिक काल से लेकर मध्यकालीन और आधुनिक काल तक, भारतीय विद्वानों ने किस प्रकार सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की गति के आधार पर समय का निर्धारण किया, इसका विश्लेषण अत्यंत वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया गया है। इसमें पंचांग की संरचना, तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण जैसे तत्वों की व्याख्या भी विस्तार से की गई है, जो भारतीय काल गणना प्रणाली की रीढ़ माने जाते हैं।

पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें भारतीय ज्योतिष को केवल धार्मिक या आध्यात्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और गणितीय आधार पर भी समझाया गया है। इसमें प्राचीन ग्रंथों जैसे वेद, वेदांग ज्योतिष, सूर्य सिद्धांत आदि के संदर्भ देकर यह बताया गया है कि भारतीय ज्योतिष का आधार कितना सुदृढ़ और तार्किक रहा है। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय काल गणना प्रणाली केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका प्रभाव अन्य सभ्यताओं पर भी पड़ा।

पुस्तक में ज्योतिष शास्त्र के इतिहास की बारीकियों को भी समझाया गया है।  ज्योतिषशास्त्र का अर्थ ‘प्रकाश देने वाला’ या ‘प्रकाश के सम्बन्ध में बताने वाला शास्त्र’ होता है अर्थात् जिस शास्त्र से संसार का मर्म, जीवन-मरण का रहस्य और जीवन के सुख-दुःख को जानने के लिए पूर्ण प्रकाश मिले, वह ज्योतिषशास्त्र है। जब हम ज्योतिष विषयक शास्त्रों का अध्ययन करते हैं तो इस बात को गहराई से अनुभव करते हैं कि भारतीय ज्योतिषशास्त्र ने इस जगत् को मिथ्या नहीं माना है, अपितु आगे के जीवन के परिमार्जन के लिए एक अवसर माना है। इस कारण ज्योतिष निर्माताओं के दो लक्ष्य स्पष्ट दिखाई देते हैं- व्यावहारिक और पारमार्थिक। यहाँ ज्योतिष के व्यावहारिक लक्ष्य का अर्थ है- ‘मानव के इस जीवन को सुखी बनाना’ और पारमार्थिक का अर्थ है- ‘इस जीवन के बाद के जीवन को सुखी बनाना’।

भारतीयों ने कई हजार वर्षों तक ज्योतिष जैसे गूढ़ विषय का सांगोपांग विकास किया जिसके कारण आज भारत में प्राचीन ज्योतिष से सम्बन्धित एक लाख से अधिक ग्रंथों की पाण्डुलिपियां देश भर में फैले पोथीघरों एवं संग्रहालयों में संचित हैं। इस पुस्तक में उन विशिष्ट ग्रंथों के ज्ञान को भी काम में लिया गया है।

इसके अतिरिक्त, पुस्तक में विभिन्न काल गणना पद्धतियों जैसे सौर वर्ष, चंद्र वर्ष और लूनी-सोलर (सौर-चंद्र) प्रणाली की तुलना भी की गई है। इससे पाठक यह समझ पाते हैं कि भारतीय समय गणना प्रणाली कितनी लचीली और सटीक थी। साथ ही, इसमें भारतीय त्योहारों, व्रतों और महत्वपूर्ण तिथियों के निर्धारण में ज्योतिष और काल गणना की भूमिका को भी स्पष्ट किया गया है।

डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने इस पुस्तक में जटिल विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे यह सामान्य पाठकों के लिए भी सहज समझ में आने योग्य बन जाती है। पुस्तक में दिए गए उदाहरण, सारणी और ऐतिहासिक संदर्भ इसे और अधिक उपयोगी बनाते हैं। यह न केवल एक शैक्षणिक पुस्तक है, बल्कि भारतीय परंपरा और विज्ञान के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है।

संक्षेप में, भारतीय ज्योतिष एवं काल गणना का इतिहास भारतीय ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा को समझने का एक सशक्त माध्यम है, जो अतीत के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वर्तमान पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रत्येक भारतीय को यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए (everyone must read).