Availability: In Stock

राजशाही का अंत (पेपरबैक)

SKU: 978-93- 868134-8- 0

Original price was: ₹700.00.Current price is: ₹400.00.

  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 360
  • Book Format: पेपरबैक, डिजिटल  प्रिंटिंग, रॉयल साइज
  • Publisher: Shubhda Prakashan

25 in stock (can be backordered)

Description

राजशाही का अंत (पेपरबैक)

राजशाही का अंत (पेपरबैक) पुस्तक में राजपूताना रियासतों को भारत संघ में मिलाने के समय घटित हुई राजनीतिक एवं प्रशासनिक घटनाओं को विस्तार से लिखा गया है। उस समय भारत में रह गई 565 देशी रियासतों के राजाओं को यह विश्वास दिलाया गया था कि भावी लोकतंत्र में छोटी रियासतों को उनकी निकटवर्ती रियासतों में मिलाकर बड़ी प्रशासनिक इकाइयों का निर्माण किया जाएगा किंतु बड़ी रियासतों को भारत के भीतर, स्वतंत्र रियासत के रूप में बने रहने दिया जाएगा किंतु देश की आजादी के बाद रियासतों में उत्तरदायी शासन की मांग के लिए प्रजामण्डल आंदोलन चले जिनके कारण रियासतों में बेचैनी फैल गई तथा लगभग दो वर्ष के बहुपक्षीय संघर्ष के पश्चात् भारत सरकार को ये रियासतें राजस्थान में मिलानी पड़ीं और राजस्थान का वर्तमान स्वरूप सामने आया। इस दौरान विभिन्न रियासतों में बहुत सी घटनाएं घटीं। रियासती संविधानों का निर्माण हुआ, लोकप्रिय सरकारें बनीं किंतु जन-आक्रोश के समक्ष रियासतें टिक नहीं सकीं। जब रियासतों का विलोपन होने लगा तब सरदार पटेल पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने राजाओं के साथ धोखा किया है। इस पुस्तक में उस ऐतिहासिक युग की घटनाओं को विस्तार एवं विश्वसनीयता के साथ लिखा गया है।