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लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) (Red Cover)

Original price was: ₹1,350.00.Current price is: ₹675.00.

  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 696
  • Book Format: हार्ड बाउण्ड, डिजिटल प्रिंटिंग, रॉयल साइज
  • Publisher: Shubhda Prakashan

25 in stock (can be backordered)

Description

लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) | Red Fort History Book in Hindi

प्रसिद्ध इतिहासकार एवं लेखक डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) केवल लाल किले का इतिहास नहीं, बल्कि सत्ता संघर्ष, षड्यंत्र, विश्वासघात, क्रूरता और राष्ट्रप्रेम की एक मार्मिक ऐतिहासिक यात्रा है।

मुगल साम्राज्य, लाल किला और भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज

यदि आप मुगल शासक शाहजहाँ के शासन से लेकर अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर तक के काल का इतिहास गहराई से समझना चाहते हैं, तो लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback)” आपके लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संग्रहणीय पुस्तक है।

यदि आप मुगल Mughal History Book, Red Fort History in Hindi, Indian History Books अथवा भारत के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास को गहराई से समझना चाहते हैं, तो लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback)” आपके लिए महत्वपूर्ण और संग्रहणीय पुस्तक है।

यह पुस्तक मुगल साम्राज्य के उत्थान और पतन से लेकर भारत के स्वतंत्रता संघर्ष तक की घटनाओं को अत्यंत प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत करती है। इतिहास के शोधार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थियों तथा भारतीय इतिहास में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक एक अमूल्य धरोहर है।

लाल किले के निर्माण से पतन तक का जीवंत इतिहास

डॉ. मोहनलाल गुप्ता की पुस्तक लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) मुगल साम्राज्य के पतन और भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का एक प्रामाणिक व जीवंत दस्तावेज है। इस ऐतिहासिक ग्रंथ में लेखक ने लाल किले के निर्माण (1638 ई.) से लेकर 1858 ई. तक के रक्तरंजित इतिहास का मार्मिक वर्णन किया है।

लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) उन साजिशों, हत्याओं और तख्त-ओ-ताज की खूनी जंग का साक्ष्य प्रस्तुत करती है, जो मुगल हरम और शाही दरबारों में रची गईं। पुस्तक में विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार सत्ता प्राप्ति के लिए भाई ने भाई का रक्त बहाया और पुत्र ने पिता को कारागार में डाल दिया।

लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) में वर्णित प्रमुख ऐतिहासिक विषय:

  • Red Fort History in Hindi
  • Mughal Empire History
  • Shahjahan and Aurangzeb Conflict
  • Bahadur Shah Zafar History
  • 1857 Revolt History
  • Lal Qila Trial
  • Indian Freedom Struggle

शाहजहां की कैद और औरंगजेब की सत्ता-लोलुपता

लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) में शाहजहां की कैद का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया है। जिस सम्राट ने विश्वविख्यात लाल किले और ताजमहल जैसे स्थापत्य चमत्कारों का निर्माण कराया, उसी को उसके पुत्र औरंगजेब ने सत्ता प्राप्ति के लिए कैद कर दिया।

लेखक ने औरंगजेब की महत्वाकांक्षा, राजनीतिक चतुराई और सत्ता के लिए अपनाई गई कठोर नीतियों का गहन विश्लेषण किया है। पुस्तक यह भी स्पष्ट करती है कि किस प्रकार मुगल साम्राज्य की आंतरिक कलह और विलासिता ने धीरे-धीरे साम्राज्य को कमजोर कर दिया।

औरंगजेब ने पूरे भारत में हिन्दुओं के विनाश के लिए तरह-तरह के उपाय किए, मंदिर तोड़े, संस्कृत विद्यालय नष्ट किए, हिन्दुओं पर जजिया लगाया, लोगों का सामूहिक संहार किया, इस सबका इतिहास लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) में सम्पूर्ण तथ्यों के साथ लिखा गया है। औरंगजेब की इन कार्यवाहियों के विरोध में पूरा देश ही एक साथ उठ खड़ा हुआ।

महाराणा राजसिंह का इतिहास

लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) में मेवाड़ के महाराणा राजसिंह के उस गौरवमयी इतिहास को भी लिखा है जिन्होंने उत्तर भारत में औंरगजेब के शासन की ईंट से ईंट बजा दी और औरंगजेब को लाल किला छोड़कर 25 तक दक्षिण में ही रहना पड़ा।

शिवाजी और शंभाजी का इतिहास

इस पुस्तक में छत्रपति शिवाजी और उनके पुत्र शंभाजी का इतिहास भी विस्तार से दिया गया है जिन्होंने मराठा शक्ति का उत्कर्ष करके औरंगजेब की क्रूर नीतियों का प्रबलता के साथ विरोध किया तथा दक्षिण भारत में उसके राज्य को छिन्न-भिन्न कर दिया।

पूरे देश की हुंकार का इतिहास

जिस प्रकार महाराणा राजसिंह और छत्रपति शिवाजी ने औरंगजेब की सत्ता को चुनौती दी, उसी प्रकार ब्रजभूमि के जाटों, बुंदेलखण्ड के बुंदेलों, मारवाड़ के राठौड़ों, हरियाणा के सतनामियों, पंजाब के सिक्खों और सिक्ख गुरु गोविंदसिंह, बंदा बैरागी आदि द्वारा भी लाल किले की सत्ता को प्रबल चुनौती दी गई।

बहादुरशाह ज़फ़र और मुगल साम्राज्य का अंतिम अध्याय

लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) का सबसे भावनात्मक पक्ष अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह ज़फ़र के जीवन से जुड़ा हुआ है। लेखक ने उनके निर्वासन, अकेलेपन और राजनीतिक विवशताओं का अत्यंत हृदयस्पर्शी चित्रण किया है।

मुगल इतिहास की दृष्टि से बहादुरशाह ज़फ़र केवल अंतिम बादशाह नहीं था, अपितु भारतीय इतिहास के उस दर्दनाक दौर का प्रतीक था जब मुगल सल्तनत का सूर्य अस्त हो रहा था। पुस्तक में उसके जीवन की त्रासदी को ऐतिहासिक तथ्यों और संवेदनशील भाषा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

1857 की क्रांति और लाल किला ट्रायल का विस्तृत वर्णन

लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) केवल मुगल काल तक सीमित नहीं रहती, बल्कि भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 का भारतीय विद्रोह का भी अत्यंत शोधपरक वर्णन प्रस्तुत करती है।

लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि किस प्रकार लाल किला स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख प्रतीक बन गया। इसके अतिरिक्त नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के वीर सैनिकों पर चले प्रसिद्ध “लाल किला ट्रायल” का भी विस्तृत विवरण पुस्तक में दिया गया है।

लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) में शामिल महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रसंग

लाल किला ट्रायल (Red Fort Trial)

आजाद हिंद फौज का संघर्ष

ब्रिटिश शासन और भारत

स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास

मुगल दरबार की राजनीति

शोधार्थियों और इतिहास प्रेमियों के लिए उपयोगी लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback)

यदि आप History Books in Hindi, Mughal Empire Books, Books on Indian Freedom Struggle या Historical Books in Hindi खोज रहे हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

इस पुस्तक की भाषा सरल, प्रभावशाली और तथ्यपरक है। लेखक ने कठिन ऐतिहासिक घटनाओं को भी सहज शैली में प्रस्तुत किया है, जिससे सामान्य पाठक भी इतिहास की जटिलताओं को आसानी से समझ सकता है।

यह पुस्तक विशेष रूप से निम्न पाठकों के लिए उपयोगी है:

  • इतिहास के विद्यार्थी
  • UPSC एवं प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी
  • शोधार्थी एवं इतिहासकार
  • भारतीय संस्कृति और इतिहास में रुचि रखने वाले पाठक
  • पुस्तक संग्रहकर्ता

लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) की प्रमुख विशेषताएं | Key Features

हार्डबाउंड संस्करण (Hardback Edition)

उच्च गुणवत्ता वाले हार्डबाउंड कवर के साथ संग्रहणीय संस्करण।

शोधपरक एवं प्रामाणिक सामग्री

ऐतिहासिक तथ्यों, संदर्भों और गहन अध्ययन पर आधारित पुस्तक।

सरल एवं प्रभावशाली भाषा

सामान्य पाठकों और शोधार्थियों दोनों के लिए उपयुक्त शैली।

मुगल और स्वतंत्रता इतिहास का संगम

मुगल साम्राज्य से लेकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तक का विस्तृत विवरण।

निष्कर्ष | Why You Should Read लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback)?

लाल किले की दर्द भरी दास्तान (Hardback) केवल एक इतिहास पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास की उन दर्दनाक और प्रेरणादायक घटनाओं का दर्पण है, जिन्होंने भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक दिशा को गहराई से प्रभावित किया।

यदि आप लाल किले का वास्तविक इतिहास, मुगल साम्राज्य का पतन, बहादुरशाह ज़फ़र का संघर्ष, 1857 की क्रांति और लाल किला ट्रायल जैसे विषयों को विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह पुस्तक अवश्य पढ़ें। यह ग्रंथ आपको इतिहास के उन पन्नों तक ले जाएगा, जहां सत्ता, षड्यंत्र, देशभक्ति और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

यह पुस्तक भारत में मुस्लिम शासन कैटेगरी की मुख्य पुस्तकों में से एक है। इस पुस्तक के कुछ अंश आप भारत का इतिहास वैबसाइट पर भी पढ़ सकते हैं।

इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद The Tragic History Of The Red Fort शीर्षक से उपलब्ध है।

इस पुस्तक के लेखक राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में उपनिदेशक रहे हैं। इस पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी की सरस्वती सभा का सदस्य भी बनाया गया।